Meaning of Repulsion in Hindi - हिंदी में मतलब

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Ayush Rastogi
Mar 08, 2020   •  1 view
  • विरोध

  • नफ़रत

  • जुगुप्सा

  • घृणाआ

  • प्रतिक्षेप

  • प्रतिकर्षण

Synonyms of "Repulsion"

Antonyms of "Repulsion"

"Repulsion" शब्द का वाक्य में प्रयोग

  • But the purified heart is rid of anger, rid of fear, rid of hatred, rid of every shrinking and repulsion: it has a universal love, it can receive with an untroubled sweetness and clarity the various delight which God gives it in the world.
    पर शुद्ध हृदय क्रोध, भय, घृणा तथा प्रत्येक प्रकार की जुगुप्सा एवं विकर्षण से मुक्त होता हैः वह सार्वभौम प्रेम से युक्त होता है, वह इस जगत् में परमेश्वर के द्वारा प्राप्त नानविध आनन्द को प्रशान्त मधुरता तथा निर्मलता के साथ ग्रहण कर सकता है ।

  • Difference is there, variation of expression is there and this variation we shall appreciate, far more justly than we could when the eye was clouded by a partial and erring love and hate, admiration and scorn, sympathy and antipathy, attraction and repulsion.
    भेद का अस्तित्व है ही, अभिव्यक्ति की विविधता भी विद्यमन है और विद्यमान है और इस विविधता को हम खूब अच्छी तरह समझेंगे, - पहले जब हमारी दृष्टि पक्षपातपूर्ण तथा भ्रान्तिशील प्रेम और घृणा से, स्तुति और निन्दा से, सहानुभूति और वैर - विरोध से तथा राग और द्वेष तिमिराच्छन्न थी तब हम इसे जितना समझ पाते थे उसकी अपेक्षा अब बहुत अधिक ठीक रूप में समझ पायेंगे ।

  • Its method is to reject at once the attraction or the repulsion of things, to cultivate for them a luminous impassivity, an inhibiting rejection, a habit of dissociation and desuetude.
    इसकी विधि - पदार्थों के आकर्षण या विकर्षण को एक ही साथ त्याग देना, उनके प्रति एक प्रकाशमय अविकार्य अवस्था का, उनका निषेध करने वाली एक परित्याग - वृत्त का तथा उनसे समबन्ध विच्छेद करने एवं उनका प्रयोग न करने के अभ्यास का विकास करना ।

  • Such a situation is therefore called repulsion.
    इस स्थिति को विलग्नता1 कहते हैं ।

  • For when we feel the physical being to be not ourselves, but only a dress or an instrument, the repulsion to the death of the body which is so strong and vehement an instinct of the vital man must necessarily weaken and can be thrown away.
    क्योंकि, जब हम यह अनुभव करते हैं कि स्थूल देह हमारा अपना स्वरूप नहीं, बल्कि केवल हमारा वस्त्र या यन्त्र है तब शरीर की मृत्यु से जुगुप्सा की वृत्ति जो प्राणप्रधान मनुष्य में इतनी तीव्र एंव प्रबल होती है अनिवार्यतः ही दुर्बल पड़ जाती है तथा बाहर निकाल फेंकी जा सकती है ।

  • the property of attraction or repulsion possessed by a magnet
    किसी चुम्बक का आर्कषण अथवा विकर्षण बल

  • Then too the right activity of the heart can be brought to the surface ; for we find then that behind this emotion - ridden soul of desire there was waiting all the while a soul of love and lucid joy and delight, a pure psyche, which was clouded over by the deformations of anger, fear, hatred, repulsion and could not embrace the world with an impartial love and joy.
    तभी हृदय की यथार्थ क्रिया उपरितल पर प्रकट हो सकती है; क्योंकि तब हम देखते हैं कि इस आवेशाधीन कामनामय पुरुष के पीछे प्रेममय, निर्मल हर्षमय एवं आनन्दस्वरूप आत्मा, शुद्ध चैत्य, सदा ही प्रतीक्षा कर रहा था, वह क्रोध, भय, घृणा, द्वेष के विकारों से अच्छादित था और इसलिये जगत् का आलिंगन राग - द्वेषरहित प्रेम तथा आनन्द के साथ नहीं कर सकता था ।

  • Magnetism is a force of attraction or repulsion exhibited by magnets.
    चुम्बकशक्ति एक चुम्बक द्वारा प्रदर्शित आर्कषण अथवा विकर्षण बल है

  • Such dissolution it dreads or desires, denies or affirms according to its measure of attachment to or repulsion from this present play of embodied mind and vitality.
    देहबद्ध मन और प्राण की इस वर्तमान क्रीड़ा के प्रति अपनी आसक्ति या घृणा की मात्रा के अनुसार वह ऐसे लय से डरता है और इसकी कामना करता है, इसे अस्वीकार कर देता है या स्वीकार कर लेता है ।

  • In the God - nature to which we have to rise there can be an adamantine, even a destructive severity but not hatred, a divine irony but not scorn, a calm, clear - seeing and forceful rejection but not repulsion and dislike.
    दैवी प्रकृति में, जिसकी ओर हमें आरोहण करना है, एक वज्रोपम यहांतक कि विनाशक कठोरता हो सकती है, परन्तु घृणा नहीं ; दिव्य व्यंग्य हो सकता है किन्तु तिरस्कार नहीं ; शान्त, स्पष्टदर्शी और प्रबल निराकरण हो सकता है पर घृणा और जुगुप्सा नहीं ।

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