Meaning of Disdain in Hindi - हिंदी में मतलब

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Ayush Rastogi
Mar 07, 2020   •  2 views
  • उपेक्षा करना

  • अवहेलना

  • अवहेलना करना

  • नफरत

  • उपेक्षा

Synonyms of "Disdain"

"Disdain" शब्द का वाक्य में प्रयोग

  • The ardours of the heart and the violences of the eager will that seek to take the kingdom of heaven by storm can have miserable reactions if they disdain to support their vehemence on these humbler and quieter auxiliaries.
    यदि हृदय की उत्कण्ठाएं और उत्सुक संकल्प की उग्रताएं, - जो स्वर्ग के राज्य को बलपूर्वक अपने अधिकार में कर लेना चाहती हैं, - इन अधिक विनीत और शान्त सहायकों को अपनी प्रचणडता का आधार बनाने से घृणा करें, तो वे दुःखदायी प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकती हैं ।

  • When those who disbelieved harbored in their hearts disdain, the disdain of ignorance, but Allah sent down His tranquillity on His Apostle and on the believers, and made them keep the word of guarding, and they were entitled to it and worthy of it ; and Allah is Cognizant of all things.
    था जब काफ़िरों ने अपने दिलों में ज़िद ठान ली थी और ज़िद भी तो जाहिलियत की सी तो ख़ुदा ने अपने रसूल और मोमिनीन पर अपनी तरफ़ से तसकीन नाज़िल फ़रमाई और उनको परहेज़गारी की बात पर क़ायम रखा और ये लोग उसी के सज़ावार और अहल भी थे और ख़ुदा तो हर चीज़ से ख़बरदार है

  • ' Satrugna is struck with self - disdain as he listens to these poignant words.
    जब शत्रुघ्न इन उद्वेजक शब्दों को सुनते हैं, तब वे आत्म - घृणा से भर जाते हैं ।

  • The righteously striving believers will receive the reward for their deeds and extra favors from God. But those who disdain the worship of God out of pride will suffer the most painful torment. They will find no guardian or helper besides God.
    पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार

  • O ye who believe! When ye deal with each other, in transactions involving future obligations in a fixed period of time, reduce them to writing Let a scribe write down faithfully as between the parties: let not the scribe refuse to write: as Allah Has taught him, so let him write. Let him who incurs the liability dictate, but let him fear His Lord Allah, and not diminish aught of what he owes. If they party liable is mentally deficient, or weak, or unable Himself to dictate, Let his guardian dictate faithfully, and get two witnesses, out of your own men, and if there are not two men, then a man and two women, such as ye choose, for witnesses, so that if one of them errs, the other can remind her. The witnesses should not refuse when they are called on. disdain not to reduce to writing for a future period, whether it be small or big: it is juster in the sight of Allah, More suitable as evidence, and more convenient to prevent doubts among yourselves but if it be a transaction which ye carry out on the spot among yourselves, there is no blame on you if ye reduce it not to writing. But take witness whenever ye make a commercial contract ; and let neither scribe nor witness suffer harm. If ye do, it would be wickedness in you. So fear Allah ; For it is Good that teaches you. And Allah is well acquainted with all things. If ye are on a journey, and cannot find a scribe, a pledge with possession. And if one of you deposits a thing on trust with another, let the trustee discharge his trust, and let him Fear his Lord conceal not evidence ; for whoever conceals it, - his heart is tainted with sin. And Allah knoweth all that ye do.
    ऐ ईमान लानेवालो! जब किसी निश्चित अवधि के लिए आपस में ऋण का लेन - देन करो तो उसे लिख लिया करो और चाहिए कि कोई लिखनेवाला तुम्हारे बीच न्यायपूर्वक लिख दे । और लिखनेवाला लिखने से इनकार न करे ; जिस प्रकार अल्लाह ने उसे सिखाया है, उसी प्रकार वह दूसरों के लिए लिखने के काम आए और बोलकर वह लिखाए जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो । और उसे अल्लाह का, जो उसका रब है, डर रखना चाहिए और उसमें कोई कमी न करनी चाहिए । फिर यदि वह व्यक्ति जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो, कम समझ या कमज़ोर हो या वह बोलकर न लिखा सकता हो तो उसके संरक्षक को चाहिए कि न्यायपूर्वक बोलकर लिखा दे । और अपने पुरुषों में से दो गवाहो को गवाह बना लो और यदि दो पुरुष न हों तो एक पुरुष और दो स्त्रियाँ, जिन्हें तुम गवाह के लिए पसन्द करो, गवाह हो जाएँ ताकि यदि एक भूल जाए तो दूसरी उसे याद दिला दे । और गवाहों को जब बुलाया जाए तो आने से इनकार न करें । मामला चाहे छोटा हो या बड़ा एक निर्धारित अवधि तक के लिए है, तो उसे लिखने में सुस्ती से काम न लो । यह अल्लाह की स्पष्ट से अधिक न्यायसंगत बात है और इससे गवाही भी अधिक ठीक रहती है । और इससे अधिक संभावना है कि तुम किसी संदेह में नहीं पड़ोगे । हाँ, यदि कोई सौदा नक़द हो, जिसका लेन - देन तुम आपस में कर रहे हो, तो तुम्हारे उसके न लिखने में तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं । और जब आपम में क्रय - विक्रय का मामला करो तो उस समय भी गवाह कर लिया करो, और न किसी लिखनेवाले को हानि पहुँचाए जाए और न किसी गवाह को । और यदि ऐसा करोगे तो यह तुम्हारे लिए अवज्ञा की बात होगी । और अल्लाह का डर रखो । अल्लाह तुम्हें शिक्षा दे रहा है । और अल्लाह हर चीज़ को जानता है

  • Indeed those who are near your Lord do not disdain to worship Him. They glorify Him and prostrate to Him.
    निस्संदेह जो तुम्हारे रब के पास है, वे उसकी बन्दगी के मुक़ाबले में अहंकार की नीति नहीं अपनाते ; वे तो उसकी तसबीह करते है और उसी को सजदा करते है

  • As for the believers, who do deeds of righteousness, He will pay them in full their wages, and He will give them more, of His bounty ; and as for them who disdain, and wax proud, them He will chastise with a painful chastisement, and they shall not find for them, apart from God, a friend or helper.
    पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार

  • Then they turned in disdain from the commandment of their Lord, and the thunderbolt took them and they themselves beholding
    किन्तु उन्होंने अपने रब के आदेश की अवहेलना की ; फिर कड़क ने उन्हें आ लिया और वे देखते रहे

  • For one piece of proof, note this reversal a few weeks ago: Yasser Arafat announced his belated acceptance of a generous Israeli offer that he had spurned two years earlier. This time, however, the Israelis responded with disdain.
    इजरायल विजयी हो रहा है

  • Given SCAF ' s explicit disdain for the election results, we are also surprised that analysts expect these significantly to bear on the country ' s future. In fact, SCAF manipulated the recent elections for its own benefit ; Islamists are pawns in this drama, not kings. We are witnessing not an ideological revolution but a military officer corps staying dominant to enjoy the sweet fruits of tyranny. Jan. 24, 2012 addendum: This is the second co - authored with Cynthia Farahat looking at Egypt ' s fraudulent elections. The prior one covered the first round of parliamentary elections. Related Topics: Egypt receive the latest by email: subscribe to daniel pipes ' free mailing list This text may be reposted or forwarded so long as it is presented as an integral whole with complete and accurate information provided about its author, date, place of publication, and original URL. Comment on this item
    एससीएएफ ने जिस प्रकार स्पष्ट रूप से इन चुनाव परिणामों की अवहेलना की है उससे हमें भी आश्चर्य है कि विश्लेषक इस बात की अपेक्षा कर रहे हैं कि इसका देश के भविष्य पर प्रभाव होगा । वास्तव में एससीएएफ ने इन चुनावों में अपने लाभ के लिये हेराफेरी की है, इस्लामवादी तो इस पूरे नाटक में प्रयोग किये जा रहे हैं और उनकी स्थिति बन्धक की है जिसके आधार पर सौदेबाजी हो सके वे असली राजा नहीं है । हम एक वैचारिक क्रांति के साक्षी नहीं बन रहे हैं वरन सैन्य अधिकारी आत्यंतिक शासन के मधुर फल का आनंद लेते हुए अब भी प्रभावी भूमिका में हैं ।

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