आजमा के देखा सब्र मेरा...

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Shubham Pathak
Mar 10, 2020   •  1 view

आज़मा के देख लिया लोगों ने सब्र मेरा

जो मुझमें था कभी वो इंसान अब मर चुका है।

कभी हवाओं से भी लड़ जाता था जो, बेफिक्र होकर

इस बदलते समाज में वो कुछ कहने तक से डर चुका है।

आज जो दिखाते हैं आँख मुझे, सोचके की डरता हूँ मैं

ये जो करने चले हो अब तुम वो न जाने कब का कर चुका है।

शुभम पाठक

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