Meaning of Journey in Hindi - हिंदी में मतलब

profile
Ayush Rastogi
Mar 07, 2020   •  0 views
  • प्रवास

  • प्रवास करना

  • यात्रा

  • यात्रा करना

  • सफ़र करना

  • फ़ासिला

  • सफ़र

Synonyms of "Journey"

"Journey" शब्द का वाक्य में प्रयोग

  • To avoid the strain of a long and arduous journey they travelled by air.
    बेहद लंबी और कठिन यात्रा की थकान से बचने के लिए वे हवाई जहाज से गए.

  • O you who believe! When you journey in the way of God, investigate, and do not say to him who offers you peace, “ You are not a believer, ” aspiring for the goods of this world. With God are abundant riches. You yourselves were like this before, and God bestowed favor on you ; so investigate. God is well aware of what you do.
    ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम अल्लाह के मार्ग से निकलो तो अच्छी तरह पता लगा लो और जो तुम्हें सलाम करे, उससे यह न कहो कि तुम ईमान नहीं रखते, और इससे तुम्हारा ध्येय यह हो कि सांसारिक जीवन का माल प्राप्त करो । अल्लाह ने तुमपर उपकार किया, जो अच्छी तरह पता लगा लिया करो । जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है

  • These things cause misunderstandings, destroy the fun of the journey and make bitterness creep in their behaviour.
    इससे यात्रा का सारा आनंद ही समाप्त हो जायेगा, क्योंकि इस प्रकार की बातों से गलतफहमियां पैदा होती हैं और आपसी व्यवहार में कटुता आने अगती है ।

  • The month of Ramadan is the month in which the Koran was sent down, a guidance for people, and clear verses of guidance and the criterion. Therefore, whoever of you witnesses the month, let him fast. But he who is ill, or on a journey shall a similar number later on. Allah wants ease for you and does not want hardship for you. And that you fulfill the number of days and exalt Allah who has guided you in order that you be thankful.
    रमज़ान का महीना जिसमें कुरआन उतारा गया लोगों के मार्गदर्शन के लिए, और मार्गदर्शन और सत्य - असत्य के अन्तर के प्रमाणों के साथा । अतः तुममें जो कोई इस महीने में मौजूद हो उसे चाहिए कि उसके रोज़े रखे और जो बीमार हो या सफ़र में हो तो दूसरे दिनों में गिनती पूरी कर ले । अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी चाहता है, वह तुम्हारे साथ सख़्ती और कठिनाई नहीं चाहता, और चाहता है कि तुम संख्या पूरी कर लो और जो सीधा मार्ग तुम्हें दिखाया गया है, उस पर अल्लाह की बड़ाई प्रकट करो और ताकि तुम कृतज्ञ बनो

  • I would think of the faces of my fellow - passengers in train whom I saw everyday at the station near - by and during the brief journey to our common desti - nation and back from there.
    मैं रोज़ाना गाड़ी में बैठने वाले अपने साथी चेहरों के बारे में सोचता था जो हमारी छोटी - सी यात्रा में एक ही जगह पर जाकर लौट आते थे ।

  • Had it been a near adventure and an easy journey they had followed thee, but the distance seemed too far for them. Yet will they swear by Allah: If we had been able we would surely have set out with you. They destroy their souls, and Allah knoweth that they verily are liars.
    अगर सरे दस्त फ़ायदा और सफर आसान होता तो यक़ीनन ये लोग तुम्हारा साथ देते मगर इन पर मुसाफ़त की मशक़क़त तूलानी हो गई और अगर पीछे रह जाने की वज़ह से पूछोगे तो ये लोग फौरन ख़ुदा की क़समें खॉएगें कि अगर हम में सकत होती तो हम भी ज़रूर तुम लोगों के साथ ही चल खड़े होते ये लोग झूठी कसमें खाकर अपनी जान आप हलाक किए डालते हैं और ख़ुदा तो जानता है कि ये लोग बेशक झूठे हैं

  • And if ye be on a journey and ye find not a scribe, then let there be a pledge taken ; then, if one of you entrusteth the other, let the one is trusted discharge his trust, and let him fear Allah, his Lord. And hide not testimony whosoever hideth and it, his heart verily is Knower. Allah is of that which ye work
    और अगर तुम सफ़र में हो और कोई लिखने वाला न मिले तो रहन या कब्ज़ा रख लो और अगर तुममें एक का एक को एतबार हो तो फिर जिस शख्स पर एतबार किया गया है उसको चाहिये क़र्ज़ देने वाले की अमानत पूरी पूरी अदा कर दे और अपने पालने वाले ख़ुदा से डरे तुम गवाही को न छिपाओ और जो छिपाएगा तो बेशक उसका दिल गुनाहगार है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उसको ख़ूब जानता है

  • A list of places to be visited in a journey.
    उन स्थानों की सूची जिन पर यात्रा के दौरान जाना हो ।

  • They completed the journey on those mountains on foot.
    पहाडियों में पैदल चलते हुए उन्होने यह सफर पूरा किया ।

  • O ye who believe! When ye deal with each other, in transactions involving future obligations in a fixed period of time, reduce them to writing Let a scribe write down faithfully as between the parties: let not the scribe refuse to write: as Allah Has taught him, so let him write. Let him who incurs the liability dictate, but let him fear His Lord Allah, and not diminish aught of what he owes. If they party liable is mentally deficient, or weak, or unable Himself to dictate, Let his guardian dictate faithfully, and get two witnesses, out of your own men, and if there are not two men, then a man and two women, such as ye choose, for witnesses, so that if one of them errs, the other can remind her. The witnesses should not refuse when they are called on. Disdain not to reduce to writing for a future period, whether it be small or big: it is juster in the sight of Allah, More suitable as evidence, and more convenient to prevent doubts among yourselves but if it be a transaction which ye carry out on the spot among yourselves, there is no blame on you if ye reduce it not to writing. But take witness whenever ye make a commercial contract ; and let neither scribe nor witness suffer harm. If ye do, it would be wickedness in you. So fear Allah ; For it is Good that teaches you. And Allah is well acquainted with all things. If ye are on a journey, and cannot find a scribe, a pledge with possession. And if one of you deposits a thing on trust with another, let the trustee discharge his trust, and let him Fear his Lord conceal not evidence ; for whoever conceals it, - his heart is tainted with sin. And Allah knoweth all that ye do.
    ऐ ईमान लानेवालो! जब किसी निश्चित अवधि के लिए आपस में ऋण का लेन - देन करो तो उसे लिख लिया करो और चाहिए कि कोई लिखनेवाला तुम्हारे बीच न्यायपूर्वक लिख दे । और लिखनेवाला लिखने से इनकार न करे ; जिस प्रकार अल्लाह ने उसे सिखाया है, उसी प्रकार वह दूसरों के लिए लिखने के काम आए और बोलकर वह लिखाए जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो । और उसे अल्लाह का, जो उसका रब है, डर रखना चाहिए और उसमें कोई कमी न करनी चाहिए । फिर यदि वह व्यक्ति जिसके ज़िम्मे हक़ की अदायगी हो, कम समझ या कमज़ोर हो या वह बोलकर न लिखा सकता हो तो उसके संरक्षक को चाहिए कि न्यायपूर्वक बोलकर लिखा दे । और अपने पुरुषों में से दो गवाहो को गवाह बना लो और यदि दो पुरुष न हों तो एक पुरुष और दो स्त्रियाँ, जिन्हें तुम गवाह के लिए पसन्द करो, गवाह हो जाएँ ताकि यदि एक भूल जाए तो दूसरी उसे याद दिला दे । और गवाहों को जब बुलाया जाए तो आने से इनकार न करें । मामला चाहे छोटा हो या बड़ा एक निर्धारित अवधि तक के लिए है, तो उसे लिखने में सुस्ती से काम न लो । यह अल्लाह की स्पष्ट से अधिक न्यायसंगत बात है और इससे गवाही भी अधिक ठीक रहती है । और इससे अधिक संभावना है कि तुम किसी संदेह में नहीं पड़ोगे । हाँ, यदि कोई सौदा नक़द हो, जिसका लेन - देन तुम आपस में कर रहे हो, तो तुम्हारे उसके न लिखने में तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं । और जब आपम में क्रय - विक्रय का मामला करो तो उस समय भी गवाह कर लिया करो, और न किसी लिखनेवाले को हानि पहुँचाए जाए और न किसी गवाह को । और यदि ऐसा करोगे तो यह तुम्हारे लिए अवज्ञा की बात होगी । और अल्लाह का डर रखो । अल्लाह तुम्हें शिक्षा दे रहा है । और अल्लाह हर चीज़ को जानता है

0



  0