पंख थे, लेक़िन उड़ान भरने की ताकत ना थी


एक बार मेरी क़िस्मत में भी आया था वो प्यार,

जिसके पंख थे, लेकिन उड़ान भरने कि ताकत ना थी


बेफ़िकर, बेमंज़िल, अपने ही धून में चलता था,

अंजान गलिओं में कही सन्नाटो में कही छुप जाता था,

एक प्यारे छोटे बच्चे की तरह आजमाने से डर जाता था

पंख थे, लेक़िन उड़ान भरने कि ताकत ना थी


वक़्त से पहले, और देर से निकलने कि आदत सी थी उसको,

उसी के गलिओं में घूम हो जाने की पहचान थी उसकी

एक तक ताकतें रहजना और पलके बिछाये रखना

गुरुर बन चूका था उसका,

पंख थे लेक़िन, उड़ान भरने की ताकत ना थी उसमें


पंख फैलता था और झूम जाता था

लेक़िन उसके आने से सहम सा जाता था

निकलने की कोशिश करना चाहता था

लेक़िन दूर से ही बाहे फैला कर उसे गले लगा लेता था

मेरी क़िस्मत में भी आया था वो प्यार,

जिसके पंख थी लेक़िन उड़ान भरने की ताकत ना थी.










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