Meaning of Unbelief in Hindi - हिंदी में मतलब

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Ayush Rastogi
Mar 08, 2020   •  0 views
  • अविश्वास

  • विश्वासहीनता

Synonyms of "Unbelief"

Antonyms of "Unbelief"

"Unbelief" शब्द का वाक्य में प्रयोग

  • It is He who appointed you viceroys in the earth. So whosoever disbelieves, his unbelief shall be charged against him ; their unbelief increases the disbelievers only in hate in God ' s sight ; their unbelief increases the disbelievers only in loss.
    वही तो है जिसने तुम्हे धरती में ख़लीफ़ा बनाया । अब तो कोई इनकार करेगा, उसके इनकार का वबाल उसी पर है । इनकार करनेवालों का इनकार उनके रब के यहाँ केवल प्रकोप ही को बढ़ाता है, और इनकार करनेवालों का इनकार केवल घाटे में ही अभिवृद्धि करता है

  • Rather you wish to put questions to your Apostle, as Musa was questioned before ; and whoever adopts unbelief instead of faith, he indeed has lost the right direction of the way.
    क्या तुम चाहते हो कि तुम भी अपने रसूल से वैसै ही सवालात करो जिस तरह साबिक़ ज़माने में मूसा से सवालात किए गए थे और जिस शख्स ने ईमान के बदले कुफ्र एख़तेयार किया वह तो यक़ीनी सीधे रास्ते से भटक गया

  • Of those who are Jews alter words from their places and say: We have heard and we disobey and: Hear, may you not be made to hear! and: Raina, distorting with their tongues and taunting about religion ; and if they had said: We have heard and we obey, and hearken, and unzurna it would have been better for them and more upright ; but Allah has cursed them on account of their unbelief, so they do not believe but a little.
    यहूद से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बातों में उनके महल व मौक़े से हेर फेर डाल देते हैं और अपनी ज़बानों को मरोड़कर और दीन पर तानाज़नी की राह से तुमसे समेअना व असैना और वसमअ गैरा मुसमइन राअना मेरा ख्याल करो मेरे चरवाहे कहा करते हैं और अगर वह इसके बदले समेअना व अताअना और इसमाआ और के एवज़ उनजुरना कहते तो उनके हक़ में कहीं बेहतर होता और बिल्कुल सीधी बात थी मगर उनपर तो उनके कुफ़्र की वजह से ख़ुदा की फ़िटकार है

  • He is the one who made you trustees on the earth. So he who disbelieves, will bear the consequence of his unbelief. but their unbelief will only increase disgust for unbelievers in the sight of their Lord ; and their unbelief will only lead the unbelievers to greater loss.
    वह वही खुदा है जिसने रूए ज़मीन में तुम लोगों को जानशीन बनाया फिर जो शख्स काफ़िर होगा तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर पड़ेगा और काफ़िरों को उनका कुफ्र उनके परवरदिगार की बारगाह में ग़ज़ब के सिवा कुछ बढ़ाएगा नहीं और कुफ्फ़ार को उनका कुफ़्र घाटे के सिवा कुछ नफ़ा न देगा

  • We have given examples of every kind to men in this Qur ' an in various ways, and even then most men disdain everything but unbelief,
    हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए प्रत्येक तत्वदर्शिता की बात फेर - फेरकर बयान की, फिर भी अधिकतर लोगों के लिए इनकार के सिवा हर चीज़ अस्वीकार्य ही रही

  • So let the unbelief of the unbeliever not grieve you. To Us is their return and then We shall inform them of all that they did. Surely Allah knows well even the secrets that are hidden in the breasts.
    और जिस किसी ने इनकार किया तो उसका इनकार तुम्हें शोकाकुल न करे । हमारी ही ओर तो उन्हें पलटकर आना है । फिर जो कुछ वे करते रहे होंगे, उससे हम उन्हें अवगत करा देंगे । निस्संदेह अल्लाह सीनों की बात तक जानता है

  • Nor would he instruct you to take angels and prophets for Lords and patrons. What! would he bid you to unbelief after ye have bowed your will ?
    और न वह तुम्हें इस बात का हुक्म देगा कि तुम फ़रिश्तों और नबियों को अपना रब बना लो । क्या वह तुम्हें अधर्म का हुक्म देगा, जबकि तुम आज्ञाकारी हो ?

  • Do not be like those who fell into factions and differed among themselves after clear signs had come to them. A mighty chastisement awaits them on the Day when some faces will turn bright and ther faces will turn dark. Those whose faces have turned dark will be told: ' Did you fall into unbelief after you had been blessed with belief ? Taste, then, chastise - ment for your unbelief. ' And those whose faces have turned bright, they will be in the mercy of Allah, and therein they shall abide. These are the mes sages of Allah which We recite to you in truth, and Allah desires no wrong to the people of the world. To Allah belongs all that is in the heavens and the earth, and to Allah are all matters referred for decision.
    और तुम उन लोगों के ऐसे न हो जाना जो आपस में फूट डाल कर बैठ रहे और रौशन आने के बाद भी एक मुंह एक ज़बान न रहे और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा अज़ाब है

  • O Apostle! let not those grieve you who strive together in hastening to unbelief from among those who say with their mouths: We believe, and their hearts do not believe, and from among those who are Jews ; they are listeners for the sake of a lie, listeners for another people who have not come to you ; they alter the words from their places, saying: If you are given this, take it, and if you are not given this, be cautious ; and as for him whose temptation Allah desires, you cannot control anything for him with Allah. Those are they for whom Allah does not desire that He should purify their hearts ; they shall have disgrace in this world, and they shall have a grievous chastisement in the hereafter.
    ऐ रसूल जो लोग कुफ़्र की तरफ़ लपक के चले जाते हैं तुम उनका ग़म न खाओ उनमें बाज़ तो ऐसे हैं कि अपने मुंह से बे तकल्लुफ़ कह देते हैं कि हम ईमान लाए हालॉकि उनके दिल बेईमान हैं और बाज़ यहूदी ऐसे हैं कि झूठी बातें बहुत सुनते हैं ताकि कुफ्फ़ार के दूसरे गिरोह को जो तुम्हारे पास नहीं आए हैं सुनाएं ये लोग अल्फ़ाज़ की उनके असली मायने के बाद भी तहरीफ़ करते हैं कहते हैं कि अगर मोहम्मद की तरफ़ से तुम्हें यही हुक्म दिया जाय तो उसे मान लेना और अगर यह हुक्म तुमको न दिया जाए तो उससे अलग ही रहना और जिसको ख़ुदा ख़राब करना चाहता है तो उसके वास्ते ख़ुदा से तुम्हारा कुछ ज़ोर नहीं चल सकता यह लोग तो वही हैं जिनके दिलों को ख़ुदा ने पाक करने का इरादा ही नहीं किया उनके लिए तो दुनिया में भी रूसवाई है और आख़ेरत में भी बड़ा अज़ाब होगा

  • And know that among you is Allah ' s Messenger: were he, in many matters, to follow your, ye would certainly fall into misfortune: But Allah has endeared the Faith to you, and has made it beautiful in your hearts, and He has made hateful to you unbelief, wickedness, and rebellion: such indeed are those who walk in righteousness ; -
    जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह का रसूल मौजूद है । बहुत - से मामलों में यदि वह तुम्हारी बात मान ले तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ । किन्तु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुन्दरता दे दी और इनकार, उल्लंघन और अवज्ञा को तुम्हारे लिए बहुत अप्रिय बना दिया ।

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