तकनीक ,तरक्की और पदावनति

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Mayank
Aug 28, 2019   •  2 views

आज का युग कंप्यूटर का युग है , इन्टरनेट का युग है। आपकी जरूरत की हर चीज़ , हर सेवा से लेकर आपको क्या करना चाइए, कैसे करना चाइए जैसे कई सवालो का उत्तर मौजूत है। यह इन्टरनेट हमारी जीवन शैली का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन चूका है और इसने हमारी जिंदगी को आसान और बेहतर बना दिया है। मिसाल के तौर पर अगर पहले आपको खरीदी के लिए बैंक से पैसे निकालने पढ़ते थे तो आज आप बिना बैंक जाये यहाँ तक की बिना बाज़ार जाये आप वो खरीद सकते है जो आपको चाहिए है। इसके बिना जीना बहुत मुश्किल भरा हो सकता है।

मनुष्य जीवन में लगातार तरक़्क़ी करना ही बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसी वजह से आज हम इस काबिल और शक्तिशाली हो पाए है । अब हमें ज़्यादा तकलीफ़ उठाने की जरूरत नही है न ही भौतिक रूप से हर जगह होने की जरूरत है बस हमारे पास कुछ जरुरी उपकरण हो और तकनीक का सही से इस्तेमाल करने का तरीका। हम घर बैठे सब कुछ कर सकते है। कुछ सिख सकते , पैसे कमा सकते है और उन्हें खर्च भी कर सकते है। मगर हॉलीवुड की फिल्म ' द स्पाइडर मैन ' में एक बहुत अच्छा डायलॉग है जिसे मैंने हर जगह सही पाया है। उस डायलॉग का सीधा मतलब है कि बड़ी ताकत के साथ बड़ी ज़िम्मेदारिया भी आती है। यह एक तरीके का सिद्धांत है आप चाहे तो अपनी जिंदिगी के हर पहलु में इस बात को सोच सकते है। तो हमारे पास ताकत के रूप में तकनीक आयी पर क्या सच में हम लोग अपनी ज़िम्मेदारी समझ पाए है। मै उन लोगो में से नही हूँ जो हमेशा नयी तकनीकों , इन्टरनेट और बाकि नयी ऑनलाइन उपलब्धियों को बुरा भला कहते है या खुदकी न समझी से इन मानव उपलब्धियों को कोसते है। मगर हमें इनका सिर्फ इस्तेमाल नही करना चाहिये बल्कि सही इस्तेमाल करना सीखना चाहिए क्योंकि हमारी यहाँ छोटी छोटी गलतियां बड़े हादसों का कारण बन सकती है।

हाल के ही कुछ सालो में ऑनलाइन लूट का सिलसिला बहुत बड़ गया था। इसमें आपको बहला कर आपके बैंक खाते से पैसा निकाल लिया जाता था। अगर खोजने बैठेंगे तो ऐसे बहुत से केस आपको सुनने को मिल जायेंगे। हालांकि सिर्फ आर्थिक रूप से ही इससे नुकसान नही पहुँचता और भी कई तरीके है , कई कारण है। हर वर्ग , हर उम्र का शख्श इसके अचेतन रूप के इस्तेमाल से खुदके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। पहले मनुष्य सिर्फ शराब का आदि हुआ करता था मगर अब फ़ोन का आदि हो चूका है। लोग फ़ोन में गेम को लेकर पागल हुए जा रहे है। ऐसे एक गेम ब्लू वेल ने कुछ समय पहले कई लोगो की जान ले ली थी। ऐसे ही चीजो में हम शायद फँसते जा रहे है। यह एक बीमारी बनती जा रही है और इसकी चपेट में युवा वर्ग के साथ साथ उम्र दराज लोग भी आ रहे है।

लगातार फ़ोन और कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बैठने से आँखों में बहुत ही ख़राब प्रभाव पड़ते है । हम फ़ोन का इस्तेमाल ज्यादा तर गर्दन को हल्का नीचे झुका कर ही करते है। इसके वजह से हमारी गर्दन में सर्विकल की दिक्कत हो सकती है। हमारा फ़ोन लगातार रेडिएशन का आदान प्रदान है क्योंकि उसी के सहारे यह काम करता है। शोध में भी यह बात साफ़ हुई है कि यह रेडिएशन हमारे स्वस्थ के लिए ठीक नही है। तो क्या हमें इन सभी चीजो को खुद से दूर कर देना चाहिए। बिलकुल नही क्योंकि यह मानवता को पीछे ले जाने वाली बात होगी पर हमें समझना होगा की कैसे हम अपने जीवन में इन चीजों की हिस्सेदारी सीमा के अंदर ही रखे। यह बेहद जरुरी है कि हमें इन विज्ञान के चमत्कारो का हमेशा आभरी रहना चाहिए और साथ ही सचेत होकर इनका उपयोग करना चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि कैसे पता चलेगा कि तकनीक हमारे लिए आगे बढ़ने के साधन के बजाय उल्टा प्रभाव डाल रही है और किस तरीके से हम इसे नकारात्मक से सतारात्मक दिशा की ओर लेकर जा सकते है।अपने आस पास ध्यान से , जिन तकनीकों का आप इस्तेमाल कर रहे है उन पर गौर फरमाएं। जो काम आपने तकनीक के सहारे किया उसका आंकलन करे। क्या वो काम सही में जरुरी था या फिर आप जबरन में भीड़ के हिस्से बनने के लिए आपने यह काम किया। मिसाल के तौर पर हर कोई वस्तु आपको बाजार में 450 रुपये की मिल रही है हर वही वास्तु ऑनलाइन आपको 500 रुपये की मिल रही है मगर बाजार में आपको जिस दूकान से यह लेना वहाँ आपको लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा और शायद लाइन में भी लगना पड़े।इससे आपका समय तो बर्बाद होगा ही साथ में कुछ लोगो के आत्म सम्मान को भी ठेस पहुँच सकती है। तो बुद्धि यही कहेगी की ऑनलाइन ही ले लिया जाये। ऐसा कर आप बाहर जाने से बच गए, लाइन में इंतज़ार न कर समय को भी बचा लिया लेकिन जो समय आपने आलास से सोने में व्यतित कर दिया या फिर सोशल मीडिया में लोगो की तस्वीरें देखने में लग गए। क्या आपका समय सच में बचा? बिलकुल नही क्योंकि आपने उस बचे हुए समय में कोई महत्पूर्ण काम नही किया। आपने ऑनलाइन सामान समय बचाने के लिए नही बल्कि अपने आलसीपन के कारण खरीदा। इससे बेहतर तो बाजार जाकर लाना ठीक रहता, थोड़े पैसे भी बच जाते , घूमना भी हो जाता जो की बहुत जरुरी है और जीवन में शायद कोई नया अनुभव भी हो जाता। खैर यह एक उदाहरण था उम्मीद करता हूँ कि ऐसा आपने कभी न किया हो। यह पूरी तरह किसी मनुष्य के स्वयं के ऊपर निर्भर करता है कि वो अपने काम को किस तरीके से करता है परंतु तकनीक का इस्तेमाल हमेशा सचेत होकर करना जरुरी है नही तो देश के युवा सिर्फ मोबाइल में पबजी जैसे खेल में दुश्मन को मारकर खुश होते रहेंगे और असलीयत में खुदको मानसिक रूप से आहात करते रहेंगे।

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