याद आ गयी,अच्छा है

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Shubham Pathak
Mar 22, 2020   •  5 views

फ़िर से वो आवाज़ आ गयी,अच्छा है

कहीं से उसकी बात आ गयी, अच्छा है

सारा दिन, चलते चलते थक गया था मैं,

चलो आखिर रात आ गयी,अच्छा है।

बुझ रहा था कुछ दिनों से मैं ख़ाक सा,

कहीं से फ़िर से आग आ गयी,अच्छा है

बिखरी बिखरी रह रही थी न जाने क्यों

फ़िर से वो मेरे साथ आ गयी, अच्छा है।

उस तूफां में छूट गयी जो यादें उसकी

इस गम से वो हाथ आ गयी, अच्छा है

तड़प रहे थे बिन बारिश के जाने कब से

बेमौसम बरसात आ गयी, अच्छा है।

टूट रहा था कण कण सा मै न जाने क्यों

फ़िर उसकी फ़रियाद आ गयी,अच्छा है

मैं भी उसको याद कर रहा था, कब से

उसको भी मेरी याद आ गयी, अच्छा है।

शुभम पाठक

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