खुशियों के पैमाने

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Dr.Avirag Swaroop Shukla
Jun 15, 2020   •  24 views

किसी भी क्षेत्र में चाहे वो कला हो या विज्ञान या व्यापार

अक्सर देखा जाता है शिखर पर जाने वाला व्यक्ति हल्केपन का शिकार हो जाता है

हल्केपन से मेरा मतलब है अपने काम में इतना focused हो जाता है

जिससे वोधीरे धीरे अपनी surroundings दोस्तो और परिवार से दूर होता जाता है हल्के होने के लिए

वो हल्कापन कब तन्हाई बन जाता है पता नहीं चलता

उसकी चमक कब अंधेरे में तब्दील हो जाती है पता नहीं चलता

उचाईयों पर जाने के बाद सबको वो इंसान दिखता है

नहीं दिखता उसका त्याग समर्पण

जो धीरे धीरे तन्हाई अकेलेपन में तब्दील हो जाता है

उससे हरदम उतनी उम्मीद रखी जाती है

बस यही उम्मीद वो इंसान खो बैठता है

रिश्तों को अहमियत दे खुद के साथ वक़्त बिताए परिवार को वक़्त ज़रूर दे

खुशियां बहुत छोटी छोटी चीज दे जाती है उन्हें तलाशे

खुशियों के पैमाने छोटे बनाए लक्ष्य बड़ा होना चाहिए।

डॉ. अविराग

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