सुन मेरी देवी पर्वतवासनी

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Anant Agarwal
Aug 19, 2019   •  14 views

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया ॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल । ले तेरी भेंट चडाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

सुवा चोली तेरी अंग विराजे । केसर तिलक लगाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

नंगे पग मां अकबर आया । सोने का छत्र चडाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

ऊंचे पर्वत बनयो देवालाया । निचे शहर बसाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

सत्युग, द्वापर, त्रेता मध्ये । कालियुग राज सवाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

धूप दीप नैवैध्य आर्ती । मोहन भोग लगाया ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी...॥

ध्यानू भगत मैया तेरे गुन गाया । मनवंचित फल पाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया ॥

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