बरसों से ढूंढ रहा था मैं.....

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Shubham Pathak
Aug 26, 2020   •  11 views

बरसों से ढूंढ रहा था मैं, न जाने वो कहाँ गए

भूलने ही वाला था उन्हें, कि लौट कर वो आ गए।

कुछ दिनों से न जाने क्यों, बेचैनी सी रहती थी

इन्तेज़ार था कि वो आयेंगे, वो आये,और आ गए।

इस उतरे हुए चेहरे की रंगत बदल जब जाये

न देखो उनको फिर भी तुम, ये मानो कि वो आ गए।

पल भर के लिए आये थे, बस हाल जानने को

ग़र फ़िर से जाना ही था तो जाने क्यों वो आ गए।

शुभम पाठक

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